कुछ तो लोग कहेंगे क्योंकि इनका काम है सिर्फ कहना !

IAS Motivation 



आईएएस के लिए 
कुछ तो लोग कहेंगे ..क्योंकि इनका काम है सिर्फ कहना


                                  जब हम सिविल सेवा की तैयारी कर रहे होते हैं तो एक समस्या का सामना लगभग सभी करते हैं ..वह है लोगों के कमेंट्स ..!! . तैयारी के दौरान बहुत से लोग आपसे कहेंगे कि आईएएस कोई बच्चों का खेल नहीं , कोई कहेगा कि गांव वाले आईएएस नहीं बन पाते , कोई कहेगा कि आईएएस के लिए दिल्ली जाकर कोचिंग कीजिये . घर पर बैठकर कोई कलेक्टर नहीं बनता ....और भी जाने कितने तरह के लोग और कितनी तरह की बातें ..और सबसे आश्चर्य वाली बात यह है कि इनकी बातें लगातार सुनकर ही लगभग 75 % लोग दिग्भ्रमित हो जाते हैं आखिर क्यों ..? ..एक बात बताइए आईएएस का सपना किसका है .. आपका या उनका ..? .., आईएएस बनने के लिए परिश्रम किसको करना पड़ेगा ..आपको या उनको ..? .., आईएएस बनने के बाद किसके नाम के आगे आईएएस लिखा जायेगा ..आपके या उनके .. ? ..और अगर आप आईएएस नहीं बन पाए तो क्या ये लोग आकर आपसे कहेंगे कि माफ़ करना मेरी वजह से तुम्हारा सपना पूरा नहीं हो पाया ..? ..नहीं ना ......!! आपके साथ अच्छा हो या बुरा सबका सामना आपको अकेले ही करना है तो फिर अपने मन और मस्तिष्क की क्यों नहीं सुनते ..? ..क्यों अपने भाग्य का ठेका लोगों कि बातों पर डाल रखा है .. क्या इनकी बातें तय करेंगी कि आप क्या बन सकते हो और क्या नहीं ..? .


बचपन में एक कहानी सुनी थी पर उसके सही मायने आज समझ में आएं हैं ..
"" एक आदमी और उसका बेटा एक गधा खरीदकर पैदल जा रहे थे .वो एक गांव से गुजरते हैं तो लोग कहते हैं कि देखो कितने मुर्ख हैं साथ में इतना हट्टा कट्टा गधा लिए हैं और पैदल जा रहे हैं , दोनों ने सोचा फिर दोनों गधे पर बैठ गए ...अब दूसरे गांव पहुंचे तो लोग कहते हैं कि देखो इनको बेचारे गधे की जान निकाले ले रहे हैं दोनों बाप बेटा एक ही गधे पर लदे हैं ... !! ...दोनों ने फिर सोचा फिर बाप कहता है कि बेटा तू बैठा रह और बाप पैदल चलने लगता है अब तीसरे गांव में पहुंचते हैं तो लोग कहते हैं देखो बूढा बाप पैदल चल रहा है और बेटा बैठा है ...फिर बेटा नीचे आ जाता है और बाप को बैठा देता है ..अब अगले गांव पहुँचते हैं तो लोग कहते हैं कि देखो हट्टा कट्टा बाप गधे पर लदा है और छोटे से बच्चे को धूप में पैदल चला रहा है ""
 ...आशा है आप सब समझ गए होंगे .... !!
मेरा सिर्फ इतना कहना है कि लोग तो तब भी कहेंगे जब आप कुछ नहीं करेंगे तो इससे अच्छा है कुछ कीजिये ..! .....लोगों कि नहीं अपने मन और मस्तिष्क कि सुनिए और वही कीजिये जो आपका दिल कहता है , वो नहीं जो लोग कहते हैं ...!!
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आपका अपना शरद तिवारी "" निःशब्द ""
आईएएस के लिए 

साभार - शरद तिवारी सर (निःशब्द)



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