बड़े सपने देखो तो ! (Think Big Dream)



मैं अपने एक colleague के साथ बैठा बातें कर रहा था 
बातों –बातों में उसने अपनी family के किसी great achiever के बारे में बताया और फिर थोड़ा उदास हो के कहा , “ मैंने अपने छोटे -छोटे सपने तो पूरे कर लिए …पर बड़े सपने बाकी हैं ?”
मैंने कहा , “ तुमने बड़े सपने अभी तक देखे ही कहाँ कि पूरे करोगे !!!”
Friends, ये बात दरअसल हममें से ज्यादातर लोगों पे लागू होती है …हम बड़े सपने देखते ही नहीं , पूरा करना तो दूर की बात है … आप सड़क पर चलते हुए कोई बंगला देखें और कहें की मेरे पास भी एक दिन ऐसा ही बंगला होगा …और फिर उस बारे में भूल कर आराम से सो जाएं तो ये कोई सपना नहीं हुआ….
Dr. A P J Abdul Kalam ने कहा है -
“Dreams are not those you have while sleeping, but those that don’t let you sleep.”
“सपने वो नहीं होते जो आप सोते  वक़्त देखते हैं, बल्कि वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते.”
एक आम Indian का बड़ा सपना बस इतना बड़ा ही होता है …एक अच्छी सी job, अपना घर , एक four wheeler…और ऐसी ही छोटी -मोटी चीजें …
जी हाँ , मैं इन्हें छोटी चीजें ही मानता हूँ …ये तो already करोड़ों लोग कर चुके हैं अगर आप भी अपनी पूरी ज़िन्दगी बस यही achieve करने में लगा देंगे तो कौन सा बड़ा काम कर लेंगे ?
अगर भौतिक सुख सुविधाएं जुटाने की ही बात है तो एक छोटे से घर की जगह एक बड़े से बंगले के बारे में सोचिये , या एक बड़ा सा अपार्टमेंट बनाने के ख्वाब देखिये , एक छोटी सी गाड़ी में घूमने की जगह luxury cars की fleet खड़ी करने के बारे में सोचिये … common man की तरह सोचेंगे तो common man की तरह ही ज़िन्दगी बिता देंगे …पैसा जोड़ते …खर्चे काटते और अपनी खुशियाँ sacrifice करते …
ऐसा मत करिए जिस भी बारे में सोचिये बड़ा सोचिये .
हो सकता है कि आप materialistic चीजों में ज्यादा believe नहीं करते हों …और कहें कि मैं इन सब के चक्कर में नहीं पड़ता …सब मोह – माया है ….and all that… OK …ये आपका view point है …और इसमें कोई बुराई नहीं है …बशर्ते , ऐसा न हो कि आपके पास पैसे नहीं हैं इसलिए आप ये show करें की आपकी life में पैसों की importance नहीं है … at least be sincere with yourself.
खैर , चलिए मान लिया कि genuinely आपकी life में materialistic चीजों की importance नहीं है …तो फिर आपके लिए बड़ा क्या है ….शायद आप कहें कि , “मेरे लिए समाज सेवा करना बड़ा है। … मैं अपने खर्चे पर हर साल दो बच्चों को पढ़ता हूँ” ,और  इसे आप बड़ा मान लें ….but again “2” एक बहुत छोटा number है , ऐसा काम करके हो सकता है आप मन ही मन लोगों से प्रशंशा पान चाहें …बहुत लोग करेंगे भी पर मैं नहीं करूँगा …… मैं पूछुंगा – सिर्फ ‘2’ क्यों ? क्यों नहीं  आप “200” या “2000” बच्चों को पढ़ाते हैं 

हो सकता है कुछ लोग सोचें की भाई ये बन्दा कम से कम दो लोगों को तो पढ़ा रहा है …और लोग तो वो भी नहीं कर रहे हैं और मैं उसे appreciate करने की बजाये उससे सवाल कर रहा हूँ ???
हाँ , क्योंकि मेरी नज़र में ये बहुत important बन्दा है , ये 99% लोगों से अलग है …इसने अपने शौक पीछे रख दो लोगों की जिंदगियां बनायीं है , पर ये आदमी छोटा सोचता है … अगर इसकी सोच भी बड़ी हो जाए तो हम एक बड़ा बदलाव देख सकते हैं ….
आज वो सिर्फ दो लोगों को पढ़ा रहा है … क्योंकि उसने सिर्फ दो को ही पढ़ाने के बारे में सोचा था …एक नहीं हज़ार बार सिर्फ दो को पढ़ाने के बारे में सोचा था …अगर इसने 200 के बारे में सोचा होता तो आज वो 200 को पढ़ा रहा होता , ज़रूरी नहीं है अपने पैसों से , वो अपने दोस्तों , रिश्तेदारों, या NGOs की मदद लेता लेकिन अगर वो २०० के बारे में सोचता तो आज दो सौ बच्चों को पढ़ा रहा होता और मेरा उससे सवाल करने का यही reason है …मैं चाहता हूँ हर वो व्यक्ति जो अच्छा सोचता है वो बड़ा भी सोचे …
2 और 200 के सवाल पर एक और common बात सामने आती है; लोग कहते हैं ….” अगर हर आदमी दो – दो गरीब बचों को पढ़ा दे तो समस्या हल हो जायेगी !!”
पर हकीकत ये है कि न कभी हर आदमी दो -दो बच्चों को पढ़ायेगा और न इस तरह से समस्या हल होगी …ऐसा होना होता तो कब का हो चुका होता , इसलिए जो कर रहे हैं उन्हें ही बड़ा – बहुत बड़ा करना होगा .
दोस्तों , बुरे लोगों का बड़ा और अच्छे लोगों का छोटा सोचना एक समस्या है ….बहुत बड़ी समस्या है ….बुरा सोचता ही कि 1 करोड़ का fraud कर दें अच्छा सोचता है कि मेहनत से 1 लाख रूपये बना लें ….बुरा सोचता है की 10000 लोगों की ज़िन्दगी तबाह कर दें …अच्छा सोचता है की 10 लोगों की ज़िन्दगी संवार दें ….क्यों ?
आखिर बड़ा सोचने में मुश्किल क्या आती है ?

जब आप motivate होते हैं तो आप बड़ा सोचने लगते हैं , मेरी life grand होगी , मैं बहुत बड़ा मुकाम हांसिल करूँगा ….पर जैसे ही थोडा वक़्त बीतता है आपका जोश ठंडा पड़ने लगता है …अन्दर से आवाज़ आती है … अरे इतना कहाँ हो पायेगा …ये तो बहुत मुश्किल है …
आपके अन्दर की आवाज़ दरअसल सालों से छोटा सोचने की conditioning के कारण है …आपको deliberately इसे बदलना होगा …और ये तभी possible है जब आप इस आवाज़ के बावजूद बड़ा सोचते रहिये …जो करना चाहते हैं उसे visualize करते रहिये …उसे अपनी success diary में लिखते रहिये ….
जब आप ऐसा करेंगे तो एक दिन आपके अन्दर की आवाज़ भी बदल जाएगी और वो आपकी सोच की हाँ में हाँ मिलाने लगेगी और तब आप उसे हकीकत में बदलता देख पायंगे .
Friends, कुछ दिनों पहले मैं एक bakery shop के सामने से गुजर रहा था …मैंने देखा कि वहाँ का guard फटे -चीथड़े कपड़ों में खड़े 8- 10 साल के तीन लड़कों को धुत्कार के भगा रहा था ……क्यों है ऐसा ……आज भी हमारे देश में कोई इतना गरीब क्यों है कि अपना पेट भी नहीं भर सकता …क्यों नहीं सोचते हम सब बड़ा क्यों नहीं ख़तम करते अपनी mediocrity को और बदल डालते हैं अपनी और इस देश की तकदीर को ???
भला हम कैसे आँखें मूँद सकते हैं इन सबसे , हमारा luck था कि हम अच्छे घरों में पैदा हुए वर्ना उन तीन लड़कों में से एक मैं भी हो सकता था …एक आप भी हो सकते थे …क्य ऐसा नहीं हो सकता कि कम से कम basic चीजों के लिए कोई इस बात पर निर्भर ना करे कि वो किस घर में पैदा हुआ है !
आप अच्छे हैं ये अच्छा है पर आप छोटा सोचते हैं ये बुरा है …इसलिए अपनी सोच को बड़ा कीजिये …हो सकता है आपको इसकी ज़रुरत न हो पर करोड़ों हैं जिन्हें इसकी ज़रुरत है …ईश्वर ने आपको काबिल बनाया है तो उसके इस तोहफे को बेकार मत जाने दीजिये ….उठिए ; चलिए कुछ बड़ा कीजिये !!!
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